हैरिसन बार्न्स आठ हज़ार मील की दूरी तय करके आये थे लेकिन हाथ में बास्केटबॉल और आसपास दो दर्जन उत्सुक प्रतिस्पर्द्धियों के कारण उन्हें घर की कमी महसूस ही नहीं हुई।

भारत के सात दिन के दौरे के पहले चरण में, दिल्ली NCR (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) के नवनिर्मित स्पोर्ट्स परिसर में धूप से नहाये कोर्ट में किंग्स के फॉरवर्ड ने NBA एकेडमी के बच्चों के समूह को बॉल-हैंडलिंग और स्क्रिमेज के गुर सिखाये।

अक्टूबर में होने वाले NBA इंडिया गेम्स से पूर्व, सैक्रामेंटो के प्रतिनिधि के तौर पर भारत पहुँचे हैरिसन ने, 20 घंटे की उड़ान की थकान के बावजूद इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि बास्केटबॉल ने उन्हें ऐसे अवसर प्रदान किये हैं जिनकी उन्होंने कभी उम्मीद भी नहीं की थी।

“मैं खुशनसीब हूँ कि बास्केटबॉल की वजह से मुझे लगभग पूरी दुनिया देखने का मौक़ा मिला,” उन्होंने कहा। “किसी अन्य देश में जाना, वहाँ बास्केटबॉल खेलना, और इन बच्चों का आपको पहचानना, तालियाँ बजाना, हौसला बढ़ाना, आपको विनम्र बनाता है। जब कोई बच्चा आपके पास आता है, आपकी तारीफ करता है या आपका ऑटोग्राफ माँगता है तो आप बड़ा उपकृत महसूस करते हैं।”

इस यात्रा से न सिर्फ उनके पासपोर्ट पर एक नया ठप्पा लगा, बल्कि आयोवा निवासी बार्न्स भारत की विविधता भरी संस्कृति और यहाँ के उत्साही NBA फ़ैन्स को देखने के लिए भी बहुत उत्सुक थे। उन्हें आशा है कि उनकी इस यात्रा से लीग के सबसे अधिक दर्शकों वाले इस देश में बास्केटबॉल के प्रचार-प्रसार को और उसे खेलने वाले बच्चों को भी बढ़ावा मिलेगा।

“पूरी दुनिया में NBA बेहद तेज़ी से बढ़ रहा है… तुलना करके देखिये कि आज से पांच वर्ष पहले यह कहाँ था और आज कहाँ है,” बार्न्स कहते हैं। ” यहाँ के फ़ैन्स इतने पैशनेट हैं, इतने उत्साहित हैं, और पहली बार आमने-सामने खेल देखने के लिए बहुत उत्सुक हैं। “

भारत में पहली बार इस आयोजन के लिए पाँच वर्ष से कोशिशें जारी थीं और आख़िर इस वर्ष यह होने जा रहा है। अक्टूबर की 4 और 5 तारीख़ को, मुंबई में, NBA प्री-सीजन उद्घाटन गेम्स में बार्न्स और किंग्स का मुक़ाबला पेसर्स से होगा। यह लीग के पहले भारतीय मूल के टीम-मालिक विवेक रणदिवे का जीवन भर का सपना था।

कैम्पों में जूतों की चर्रखचूँ, बॉल की धप-धप और चीखती आवाज़ों के बाद बार्न्स को उम्मीद है कि NSCI डोम में उन्हें अभूतपूर्व स्वागत देखने को मिलेगा, जो गोल्डन 1 सेंटर की तरह शानदार होगा।

“जब पूरी टीम यहाँ आयेगी तो और ज़्यादा हंगामा होगा,” वे कहते हैं। “टिकट तो बस दो मिनट में बिक जायेंगे! हर कोई पहली बार NBA गेम देखने के लिए बेहद उत्साहित है, क्योंकि उन्हें पहले कभी यह मौक़ा नहीं मिला है।”

देश के केबल नेटवर्क्स पर बास्केटबॉल देखने वाले फ़ैन्स उन्हें पहचान लेते हैं और पारंपरिक भारतीय अभिनंदन “नमस्ते” से उनका स्वागत करते हैं। उन्होंने मुंबई में सोनी टेन 1 और सोनी टेन 3 के NBA प्ले-ऑफ़ के रैप अराउंड शोज़ में हिस्सा लिया और दर्शकों से जुड़ने की कोशिश की।

दिल्ली दौरे के आखिरी दिन उन्होंने भारत के राष्ट्रीय बास्केटबॉल टैलेंट खोज कार्यक्रम, चौथे ACG-NBA जम्प नेशनल फाइनल में शिरकत की ताकि एकडेमी से स्कॉलरशिप और ट्रेनिंग पाने योग्य खिलाड़ियों की पहचान की जा सके। बार्न्स को लगा कि फाइनल में पहुँचने वाले सभी पचास खिलाडियों में अपार संभावनायें हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को पिक-एंड-रोल की बारीकियाँ समझायीं और उनके साथ अपना खेल मंत्र भी साझा किया।

“मैं इन बच्चों को सबसे बड़ी सलाह यह देता हूँ कि खेल से प्यार करें,” उन्होंने बताया। “इस समय, जब आप अपने कौशल का विकास कर रहे हैं और आपके अंदर सीखने की भूख है, तब आपको सुनिश्चित करना होगा कि ‘खेल का प्यार’ सबसे महत्वपूर्ण है। जब आप बेहतर खिलाडी बनने की कोशिश में लगे हैं, तब आपका ध्यान इसी पर केंद्रित होना चाहिए।”

नए खिलाडियों को सिखाने, “मेरा नाम हैरिसन है” कहना सीखने और सुबह 6 बजे और शाम 8 बजे के वर्क-आउट के बीच बार्न्स ने भारत को जानने का भी समय निकाला। यहाँ की संस्कृति में डूबकर, लोगों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी की झलक भी देखी। 

बाज़ारों और रेस्टोरेंट से उठती तरह-तरह के खाने की ख़ुशबू से मोहित होकर उन्होंने समोसे, चिकन टिक्का, पालक पनीर, सभी का स्वाद लिया। पीट्रा और एग्सपेक्टेशन में उन्होंने जो भी व्यंजन चखे, सभी उम्मीद से बढ़कर निकले।

“इंडियन खाना मेरा सबसे पसंदीदा है, इसलिए यह कहना मुश्किल है कि मुझे कौन सी डिश सबसे ज़्यादा पसंद है,” वे कहते हैं। “और यहाँ की तो हर डिश कमाल है!  अविश्वसनीय!”

बाद में अपने 6 फुट 8 इंच के शरीर को ऑटो-रिक्शा में समेटकर उन्होंने मुंबई की सैर की और सदियों पुरानी ऐतिहासिक इमारतों – स्मारकों को देखा। बहुचर्चित फिल्म “स्लमडॉग मिलियनेयर” की पृष्ठभूमि, धारावी इलाक़े में पहुंचकर, 26 वर्षीय बार्न्स ने पसीने से तरबतर होने के बावजूद क्रिकेट का बल्ला सँभाला और भीड़ से खूब प्रशंसा बटोरी।

“कुछ नया करना बहुत मज़ेदार रहा,”उन्होंने बताया।

उनका यह घूमना-फिरना दिल्ली में भी जारी रहा, जहाँ उन्होंने इंडिया गेट समेत कई पर्यटन-स्थलों की सैर की और विश्व-विख्यात ताज महल को देखने आगरा भी गये।

ताज के बगीचों और गलियारों से गुज़रते हुए, हज़ारों अन्य लोगों की तरह बार्न्स को भी संगमरमर के इस शानदार स्मारक ने मन्त्र-मुग्ध कर दिया।

“यह दुनिया के सात अजूबों में से एक है,” वे कहते हैं। “तो उसे देख पाना, उसका इतिहास जानना, और तस्वीर खींचते हुए सोचना कि आज मैं बास्केटबॉल की वजह से यहाँ हूँ – बड़ा अद्भुत क्षण था।”

गर्मियों की सैर का कार्यक्रम पूरा करने और हर व्यंजन का स्वाद लेने के लिए एक हफ्ता बहुत कम था – लेकिन इतना जानने के लिए काफी था कि भारतीय फ़ैन्स NBA को लेकर कितने उत्साहित हैं और किंग्स के आगामी प्रदर्शन गेम्स का इस क्षेत्र पर कितना अधिक प्रभाव पड़ेगा।

“यह कहना तो कठिन है कि एक दिन बास्केटबॉल क्रिकेट से आगे निकल जायेगा, लेकिन इतना ज़रूर है कि बास्केटबॉल तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यहाँ के लोग, यहाँ के बच्चे निश्चित रूप से इसे देखते हैं, पसंद करते हैं, और बास्केटबॉल खिलाड़ी बनना चाहते हैं,” बार्न्स का कहना है। “मैं खुले दिमाग़ के साथ यहाँ आया था और यह बहुत अच्छा अनुभव रहा, इसलिए अब मैं अक्टूबर में टीम के साथ यहाँ आने के दिन गिन रहा हूँ।”

 



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